Tejashwi Yadav on SIR: राजद नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को दावा किया कि उनका नाम चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी बिहार के ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। तेजस्वी ने पटना में रिपोर्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि मैंने बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गणना फॉर्म भरा था, लेकिन अब ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट में मेरा नाम ही नहीं है। अब मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा।
तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपना EPIC नंबर डालकर सर्च किया, तो No Result Found शो कर रहा था।
तेजस्वी के दावे को आयोग ने बताया गलत
हालांकि, चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव के दावे को खारिज कर दिया और बताया कि उनका नाम ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद है। चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का वह फॉर्मेट भी जारी किया, जिसमें तेजस्वी की तस्वीर के साथ उनका नाम, उम्र, पिता का नाम और मंकान नंबर दर्ज है।
तेजस्वी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और डाटा शेयर करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। तो हमने लिस्ट शेयर की है और उनसे अनुरोध कर रहे हैं कि वह ध्यान से अपना देख लें।
बता दें कि चुनाव आयोग ने जो रिकॉर्ड शेयर किया है, उसमें तेजस्वी यादव का EPIC नंबर RAB0456228 था। और ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम सीरियल नंबर 416 पर दर्ज है।
आपको बता दें कि बिहार में SIR प्रक्रिया 1 सितंबर, 2025 को फाइनल वोटर लिस्ट आने के साथ ही समाप्त होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आश्वासन दिया है कि बिहार के सभी मतदाताओं और राजनीतिक दलों को संसोधित वोटर लिस्ट पर दावे और आपत्तियां देने के लिए 1 अगस्त से 1 सितंबर तक आमंत्रित किया जाएगा।
SIR को लेकर हो रहा लगातार हंगामा
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहा विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD), का आरोप है कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया मतदाता सूची से लाखों वैध वोटरों, विशेष रूप से दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को हटाने की साजिश है।
उनका दावा है कि SIR में आवश्यक दस्तावेजों की मांग, जैसे आधार या राशन कार्ड, कई गरीब और कमजोर वर्गों के लिए मुश्किल है, जिससे उनका मताधिकार छिन सकता है। इस मुद्दे पर संसद के मॉनसून सत्र में भी जमकर हंगामा हुआ, जहां विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किए और सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया।
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चुनावी प्रक्रिया की बढ़ेगी पारदर्शिता- चुनाव आयोग
दूसरी ओर, चुनाव आयोग (ECI) का कहना है कि SIR मतदाता सूची को शुद्ध करने और फर्जी, मृत या प्रवासी मतदाताओं को हटाने के लिए जरूरी है। ECI ने इसे संवैधानिक और नियमित प्रक्रिया बताया है, जो बिहार के बाद पूरे देश में लागू हो सकती है। आयोग का तर्क है कि इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले पर सुनवाई चल रही है, जहां NGO असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने SIR को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए चुनौती दी है। कोर्ट ने ECI से कई सवाल पूछे हैं, खासकर आधार और राशन कार्ड को वैध ID के रूप में शामिल न करने पर। हालांकि, कोर्ट ने अभी इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है।
विवाद के बीच, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है, जहां विपक्ष इसे BJP के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि BJP का कहना है कि विपक्ष बेवजह हंगामा कर रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
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