किशोर कुमार, भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली और बहुमुखी गायकों में से एक, न केवल अपनी अनूठी आवाज और अभिनय के लिए जाने जाते हैं, बल्कि अपनी विचित्र और दिलचस्प जिंदगी के किस्सों के लिए भी। किशोर कुमार की जयंती 4 अगस्त को मनाई जाती है। वे 4 अगस्त 1929 को जन्मे थे।
आज उनकी 96वीं जयंती है। इस अवसर पर फैन्स उनकी गायकी, अभिनय और बहुमुखी प्रतिभा को याद कर रहे हैं। इस आर्टिकल में उनके जीवन से जुड़े कुछ अनकहे और रोचक किस्सों के बारे में यहां चर्चा की जा रही है।
किशोर कुमार का डरावना किस्सा
किशोर कुमार को भूत-प्रेत की कहानियों से बहुत डर लगता था। एक बार फिल्म “महल” (1949) की शूटिंग के दौरान, जिसमें वह एक छोटी सी भूमिका में थे, सेट पर भूतों की चर्चा शुरू हो गई। किशोर इतने डर गए कि उन्होंने रात को शूटिंग करने से मना कर दिया और सेट छोड़कर चले गए। बाद में, निर्देशक को उन्हें मनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
“आधा पेमेंट, आधा गाना”
किशोर कुमार अपनी फीस को लेकर बहुत सख्त थे। एक बार एक निर्माता ने उन्हें आधा पेमेंट दिया और बाकी बाद में देने का वादा किया। किशोर ने गाना शुरू किया, लेकिन ठीक आधे गाने पर रुक गए और कहा, “बाकी का पैसा मिलेगा, तभी बाकी का गाना रिकॉर्ड होगा!” यह किस्सा उनकी बेबाकी और ईमानदारी को दर्शाता है।
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“नो मनी, नो मूवी”
एक बार एक निर्माता ने किशोर को फिल्म के लिए साइन किया, लेकिन पेमेंट में देरी की। किशोर ने सेट पर आने से मना कर दिया और अपने घर के बाहर एक बोर्ड लगा दिया: “Beware! Madhouse!” जब निर्माता उनके घर पहुंचा, तो किशोर ने दरवाजे से ही चिल्लाकर कहा, “पहले पैसे, फिर काम!” यह उनकी हाजिरजवाबी और हास्य का एक नमूना था।
शादी और सनक
किशोर कुमार की चार शादियाँ (रुमा घोष, मधुबाला, योगिता बाली, और लीना चंदावरकर) अपने आप में चर्चा का विषय थीं। एक बार जब वह योगिता बाली से शादी के बाद अलग हुए, तो उन्होंने अपने दोस्तों को मजाक में कहा, “मैं तो शादी के बाद भी सिंगल ही हूँ, बस थोड़ा उलझ गया!” उनकी हास्यप्रियता हर स्थिति में बरकरार रहती थी।
लता मंगेशकर के साथ नोंक-झोंक
किशोर और लता मंगेशकर की जोड़ी ने कई हिट गाने दिए, लेकिन स्टूडियो में उनकी मस्ती भरी नोंक-झोंक मशहूर थी। एक बार रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर ने लता जी को चिढ़ाने के लिए गाने के बीच में अचानक “कु-कु” जैसे अजीब शब्द जोड़ दिए। लता जी हँसते-हँसते रिकॉर्डिंग रोकने को मजबूर हो गईं।
फिल्मों से दूरी
1970 के दशक में, किशोर ने कुछ समय के लिए फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली थी। वह खंडाला में अपने फार्महाउस में चले गए और वहाँ खेती करने लगे। उन्होंने अपने दोस्तों को बताया कि वह “संगीत की खेती” करना चाहते हैं। हालाँकि, संगीत प्रेमियों और निर्माताओं के बार-बार अनुरोध पर वह वापस लौटे और कई सदाबहार गाने दिए।
अजीबोगरीब रिहर्सल
किशोर रिकॉर्डिंग से पहले गाने की रिहर्सल करने के लिए अजीब तरीके अपनाते थे। वह कभी-कभी बाथरूम में गाते, क्योंकि उन्हें लगता था कि वहाँ की गूँज उनकी आवाज को बेहतर बनाती है। कई बार वह रात में जंगल में जाकर गाने की प्रैक्टिस करते, क्योंकि उन्हें शांति और प्रकृति की आवाजें प्रेरणा देती थीं।
टैक्सी ड्राइवर बनने की इच्छा
किशोर ने एक बार मजाक में कहा था कि अगर वह गायक या अभिनेता न होते, तो वह टैक्सी ड्राइवर बनते। उन्हें गाड़ियाँ चलाने और लोगों से बात करने का शौक था। वह अक्सर अपने दोस्तों को अपनी कार में बिठाकर लंबी ड्राइव पर ले जाते और रास्ते में गाने गाते।
खंडवा के प्रति प्यार
किशोर कुमार का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था, और वे अपनी जन्मभूमि से बहुत प्यार करते थे। हर सार्वजनिक मंच पर वे गर्व से कहते थे, “किशोर कुमार खंडवे वाले!” उनकी यह मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और सादगी उनके प्रशंसकों को बहुत पसंद थी।
मधुबाला के साथ रिश्ता
किशोर कुमार की दूसरी शादी मधुबाला के साथ हुई, जो भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक थीं। लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी मुश्किलों भरी थी, क्योंकि मधुबाला दिल की बीमारी से जूझ रही थीं। 1969 में मधुबाला की मृत्यु ने किशोर दा को गहरा सदमा दिया।
निष्कर्ष
किशोर कुमार का जीवन संगीत, हास्य, और सनक का अनूठा संगम था। उनकी ये कहानियाँ न केवल उनकी रचनात्मकता और व्यक्तित्व को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि वह कितने जीवंत और अप्रत्याशित इंसान थे। उनके गाने और किस्से आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
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